बिना रजिस्ट्रेशन संचालित हो रहे पैथोलॉजी लैब
बिना रजिस्ट्रेशन संचालित हो रहे पैथोलॉजी लैब

लखीसराय, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। स्थानीय प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग के उदासीनता के कारण शहर सहित जिले में बिना रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले पैथोलॉजी लैब का संचालन किया जा रहा है। जहां मानक को ताक पर रख बिना विशेषज्ञ चिकित्सक के देखरेख में मरीज का जेनरल रूटिंग से लेकर असाध्याय बीमारी में होने वाली जांच को सहजता के साथ किया जा रहा है। दो दर्जन से अधिक पैथोलॉजी लैब का संचालन तो जिला मुख्यालय जहां जिले लगभग सभी प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग पदाधिकारी का कार्यालय है, उनके इर्द-गिर्द ही किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार शहर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्र में 100 से अधिक छोटे-बड़े पैथोलॉजी लैब का संचालन किया जा रहा है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि वर्तमान स्थिति में स्वास्थ्य विभाग से एक भी पैथोलॉजी लैब का रजिस्ट्रेशन अपडेट नहीं है। सदर अस्पताल स्थित पिओ सिटी लैब में भी अधिकांश जांच उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में सदर अस्पताल सहित विभिन्न सरकारी अस्पताल के मरीज भी इन निजी पैथोलॉजी लैब में चिकित्सक परामर्श के अनुसार अपना जांच करवा रहे हैं। पैथोलॉजी लैब चलाने के लिए अब एमडी पैथोलॉजिस्ट योग्यता होना जरूरी है। नाम नहीं छपाने के शर्त पर स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब कोई गैर योग्यता धारक व्यक्ति पैथोलॉजी लैब नहीं चला सकते हैं। यदि किसी लेबोरेटरी में रिपोर्ट पर पीजी पैथोलॉजिस्ट का हस्ताक्षर नहीं है तो उस जांच रिपोर्ट को गलत माना जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जहां टेस्ट के लिए सैंपल एकत्र किए जाते हैं लैब पर 30 या इससे अधिक सैंपल एकत्र होते हैं तो वहां एमबीबीएस चिकित्सक तैनात होना अनिवार्य है। जबकि जिले में इस नियम का लैब संचालक धज्जी उड़ा रहे हैं। शहर सहित जिले के कई निजी क्लीनिक एवं नर्सिंग होम के अंदर भी जांच घर संचालित हो रहे हैं। जिनकी नियमित जांच नहीं होती है। ना योग्यता ना रजिस्ट्रेशन जिले में आश्चर्यजनक रूप से डीएमएलडी व उनके सहयोगी तक लैब संचालित कर रहे हैं। वही रिपोर्ट में साइन करके दे रहे हैं। जबकि लैब संचालक एमबीबीएस, एमडी पैथोलॉजिस्ट होना चाहिए। इतना ही नहीं अवैध तरीके से संचालित हो रहे लैब के पास ना ही नियमानुसार पॉल्यूशन बोर्ड का रजिस्ट्रेशन है और ना ही पंजीकृत मेडिकल बेस्ट फॉर्म का पंजीयन, लैब के पास पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का रजिस्ट्रेशन, पंजीकृत मेडिकल बेस्ट सर्विस से एग्रीमेंट सीएमएचओ ऑफिस का रजिस्ट्रेशन, नगर पालिका का अनुमति पत्र, दुकान का किराया नामा होना अनिवार्य है। नियमों को ताक पर रख कर पैथोलॉजी लैब संचालित हो रहे हैं। इनके फलने फूलने के पीछे चिकित्सकों की भी कम भूमिका नहीं है जो अधिक कमीशन के चक्कर में अपने मरीज को जांच के लिए भेज रहे हैं। कई चिकित्सक तो अपनी क्लीनिक में सैंपल लेकर लैब तक पहुंचा रहे हैं। इधर सीएस डॉ बीपी सिन्हा ने बताया कि विभागीय सख्ती के बाद लगभग दो दर्जन से अधिक लैब संचालक ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन दिया है। बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित पैथोलॉजी लैब के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई व छापेमारी के लिए प्रशासनिक अधिकारी के सहयोग से टीम का गठन किया जाएगा।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।