अश्लील गीतों से सामाजिक सौहार्द पर पड़ रहा बुरा असर
अश्लील गीतों से सामाजिक सौहार्द पर पड़ रहा बुरा असर
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कजरा, एक संवाददाता। रंगों के पर्व होली के नजदीक आते ही अश्लील गानों के बजने का दौर जोर शोर से शुरु हो गया है। चौक-चौराहों से लेकर डग्गामार बसों-टैक्सियों में यह धड़ल्ले से बजाए जा रहे हैं। इसके चलते महिलाओं का राह चलना मुश्किल हो गया है। होली का पर्व ज्यों-ज्यों नजदीक आ रहा है बाजारों में द्विअर्थी गीतों की बाढ़ आती जा रही है। गांव-कसबों में चाय-पान की दुकानों से लेकर मोबाइल की दुकानों पर अश्लील गीतों को फुल वाल्यूम में बजाया जा रहा हैं। इन गीतों के माध्यम से मनचले युवक व किशोर राह आती जाती महिलाओं पर छींटा कसी व फब्तियां कसने से बाज नहीं आते हैं। इसके चलते महिलाओं का राह से गुजरना मुश्किल हो गया है। वहीं अश्लील गीतों से सामाजिक सौहार्द पर भी बुरा असर पड़ रहा है। सवारियों को बैठाने के बाद वाहन चालक होली के द्विअर्थी गीतों को बजाना शुरू का देते हैं। इससे वाहन में बैठी महिलाओं व किशोरियों को पूरी यात्रा में शर्मसार होना पड़ता है। जब कभी कोई यात्री गाना पर आपत्ति करता है तो चालक व खलासी उसकी बातों को अनसुना कर देते हैं। इसके चलते लोगों में प्राय: विवाद होता है। लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए अनेक प्रावधानों की व्यवस्था की गई है। लेकिन अश्लील गीतों पर कारवाई नहीं होने से मनचलों के हौसले बुलंद हैं।
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