चार दिवसीय चैती छठ का खरना आज
चार दिवसीय चैती छठ का खरना आज

लखीसराय, एक प्रतिनिधि। नहाय-खाय के साथ मंगलवार को चैती छठ का शुभारंभ सोमवार से हो चुका है। वही छठ व्रती गंगा स्नान कर प्रसाद ग्रहण किया। वही शहर के पुरानी बाजार महावीर स्थान में छठ घाट का समतलीकरण कर रास्ता बनाने का कार्य किया जा रहा है। समिति के सौरभ कुमार चिक्कू ने बताया कि कमिटि के द्वारा इस बार तैयारी किया जा रहा है। छठ वर्तियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए नदी में रास्ता बनाया गया है। वही दो दिनों के अंदर नदी में जमे पानी को साफ करने का प्रयास या बगल में ही पोखर बनाकर पंप लगा दिया जाऐगा। ज्ञात हो कि बुधवार को खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो रहा है। सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत समाप्त होगा, लोक आस्था का महापर्व चैती छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान आज चौत्र शुक्ल तृतीया उपरांत चतुर्थी मंगलवार को नहाय-खाय से शुरू हुआ। छठ व्रती गंगा नदी में स्नान करने के बाद अपने साथ गंगाजल घर लेकर पहुंचे। पूजन के बाद प्रसाद के रूप में अरवा चावल, सेंधा नमक से निर्मित चने की दाल, लौकी की सब्जी, आंवला की चटनी आदि ग्रहण कर चार दिवसीय अनुष्ठान का संकल्प लिया। परिवार की सुख समृद्धि तथा कष्टों के निवारण के लिए किए जाने वाले इस व्रत की खासियत है कि इस पर्व को करने के लिए किसी पुरोहित पंडित की आवश्यकता नहीं होती और नहीं मंत्रोच्चारण की कोई जरूरत है। छठ पर्व में साफ-सफाई का विशेष महत्व रखा जाता है। व्रती महिलाएं छठ पूजा की तैयारियों में जुट गई हैं।
छठ को लेकर बाजारों में बढ़ी रौनक
लखीसराय, एक प्रतिनिधि।
लोक आस्था का महापर्व छठ के लेकर बाजारों में भी रौनक बढ़ने लगी है। छठ अनुष्ठान शुरू करने काफी संख्या में व्रती और श्रद्धालु ट्रेनों व सड़क मार्ग से बड़हिया सहित विभिन्न गंगा घाटों में आस्था की डुबकी लगाई। जिला मुख्यालय स्थित केआरके मैदान में बाजार सज गया है। छठ की खरीददारी को लेकर लोग पहुंच रहे है। इसके अलावा बाजार में पूजन सामग्री, मिट्टी बर्तन, कपड़े, श्रृंगार सामग्री की दुकानों में महिलाओं की अधिक भीड़ देखी गई। महिलाओं ने सूती सहित अन्य फैंसी साड़ियों की खरीदारी की। श्रृंगार दुकान में लहठी की खूब बिक्री हुई। हर के नया बाजार स्थित केआरके हाई स्कूल खेल मैदान में छठ पर्व को लेकर अस्थायी दुकानें सजने लगी है। बाजारों में बांस निर्मित सूप, दउरा आदि की भी लोगों ने खरीदारी की। बुधवार को खरना, गुरुवार को भगवान भाष्कर का पहला अर्घ्य तथा शुक्रवार को उद्याचल सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ अनुष्ठान संपन्न होगा। पर्व को लेकर ग्रामीण अंचलों में महिलाओं ने मिट्टी के चूल्हे तैयार किए जिस पर प्रसाद बनाए जाएंगे। बाजारों में लोहे के चूल्हा की बिक्री भी हुई।
स्वच्छता व पवित्रता का विशेष महत्व
चानन, निज संवाददाता।
नहाय-खाय के साथ चैती छठ पर्व मंगलवार से शुरू हो गया है। व्रती द्वारा पवित्र जल में स्नान कर चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी का शुद्ध भोजन भगवान सूर्य पर चढ़ा कर प्रेम से ग्रहण किया। चैती छठ चैत नवरात्रि में मनाया जाता है। पर्व के दौरान स्वच्छता और पवित्रता का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रती अपने शरीर और मन को शुद्ध करते हैं, ताकि वे अगले तीन दिनों के कठिन व्रत को विधिपूर्वक कर सकें। दूसरे दिन बुधवार को पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर खरना का प्रसाद बनाया जाता है। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है।
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