आपूर्ति कार्यालय की लचर व्यवस्था से मजदूरों को कम मिल रही है मजदूरी
अलौली में लाभुकों के बीच राशन वितरण की व्यवस्था में भारी कमी आई है। एसएफसी ठेकेदार की मनमानी और मजदूरों के शोषण के कारण गरीब परिवारों में आक्रोश है। राशन कार्ड में नाम जोड़ने के लिए कचरा प्रबंधन का...

अलौली। एक प्रतिनिधि प्रखंड आपू्त्तित कार्यालय लाभुकों के बीच अपना विश्वास खोता जा रहा है। आपू्त्तित कार्यालय की लचर व्यवस्था कहा जाय या मनमानी के कारण मजदूरों व लाभुकों में आक्रोश है। मिली जानकारी के अनुसार एसएफसी के ठेकेदार मोटिया मजदूर को वंधुआ मजदूर की तरह काम लेते हैं। गरीब बंचित परिवार का मजदूर मोटिया का काम लाचारी मे कर रहा है। बताया जाता है कि एसएफसी मजदूर को 11 रुपये 64 पैसे प्रति लोडिंग व अनलोडिंग की दर निर्धारित कर रखा है। उसके बदले मोटिया को मात्र चार रुपए दिया जा रहा है। वर्त्तमान मे 36 मोटिया कार्यरत बताया जा रहा है। पीडीएस गोदाम स्थल के पास मोटिया को बैठने के लिए ना तो अब तक कोई बैठका बनाया गया है ना ही शौचालय है ना तो पानी पीने का कोई साधन ही उपलब्ध हो पायी है। उक्त संदर्भ में मोटिया संघ कई बार आवाज उठा चुका है, परन्तु किसी भी स्तर से इस पर पहल नहीं हो पायी है। जिला प्रशासन को भी उक्त समस्या को लेकर जागरूक होने की जरूरत है। बताया जाता है कि मोटिया को अब तक श्रम विभाग से भी निबंधित नहंी कराया गया हैा। गरीब परिवार के मजदूरों को कई प्रकार का दंश झेलना लाचारी बना हुआ है।
राशन कार्ड में पुन: नाम जोड़ने के आवेदन में कचरा प्रबंधन का भुगतान रसीद जरूरी: राशन कार्ड में पुन: नाम जोड़ने के आवेदन में कचरा प्रबंधन का भुगतान रसीद लगाने पर ही ऑनलाइन आवेदन लिया जाता है। वह भी एक बारगी तीन साल का भुगतान। जवकि कचरा प्रबंधन का संचालन कार्य दो साल भी पूरा नहीं हो पाया है। मुफ्त राशन के लाभार्थी वीणा देवी, मीना देवी, उषा देवी, कौशल्या देवी आदि ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि कुछ पंचायत के चुने डीलर के पास ही उसना चावल आता है। पंचायत के शेष डीलर के पास अरवा चावल मिलता है। वह भी कुछ बोरा सड़ा गला ही आता है। उसना चावल लेने पर प्रति यूनिट राशन कम मिलता है। घटिया अरवा चावल लेने पर उसी जगह अलग से औने पौने भाव मे बेचना पड़ता है। वही मीरा देवी, लारो देवी ने तो यहां तक बताया कि जो डीलर के साथ खुलकर बोलता है उसके केवाईसी करने के समय कुछ ऐसा किया जाता है कि उसे राशन से वंचित रहना पड़े। राशन कार्ड में जितने लाभुक हैं संख्या उतनी ही रहती है, परन्तु एक नाम कई बार लिख कर लाभ से वंचित किया जाता है। डीलर की गलती और लाभुक को पुन: नाम जोड़ने के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा करने को कहा जाता है। कार्यालय के बावू लोग और डीलर की गठजोड़ से लाभुक को मुफ्त राशन से वंचित रखा जाताा है। शिकायत करने पर भी सुनने वाले और सही से समझने की फुर्सत किसी को नहंी है। जिस कारण राशन से वंचित होने वाले लोगों के बीच आक्रोश व्याप्त है।
एसएफसी ठेकेदार की मनमानी चरम पर: बताया जाता है कि बेगूसराय के ठेकेदार को एसएफसी अलौली पीडीएस गोदाम की जिम्मेदारी दी गई है। कार्यस्थल पर प्रवीण कुमार चौधरी एवं विनय सिंह लोडिंग एवं अनलोडिग का काम देखते हैं। जो चुनिंदा डीलर से मोटी कमाई कर उसना चावल दिया करते है। नहंी बोलने वाले डीलर को जैसा तैसा चावल दिया जाता है। जिस कारण कई पंचायतों के लाभुक उसना चावल उठाव करते हैं। वही किसी डीलर का आवंटन बढ़ता है तो शेष का कम हो रहा है।
डीलरों की है अपनी अलग समस्या : दबीी जुवान मंे डीलर बताते है कि ठेकेदार डीलरों के साथ दोरंगी नीति अपनाते तो हैं ही धर्मकाटा पर लोड वाहन तौल मे एक क्विंटल राशन कम मिलता है। बोरा का वजन भी चावल के साथ जोड़ा जाता है। कुछ डीलर को अनलोडिंग खर्च भी मोटिया को देनी पड़ती है। धर्मकाटा पूर्जा सही तौल का देता है। इसकी भरपाई डीलरों को करना पड़ता है। उसना चावल प्राप्त करने डीलरों का आवंटन प्रति माह बढ़ता है शेष का घटता है। इसी से विभाग एवं ठेकेदार का खेल बेल समझने के लिए काफी है।
बोले लोग:
1. अधिकांश डीलरों की मनमानी चलती है। शिकायत भी पदाधिकारी नहीं सुनते। राशन का वजन भी सही नहंी मिलता।
सोनिया देवी, उपभोक्ता।
2. केवाईसी के समय डीलर की गलती से सदस्य का नाम आपू्त्तित कार्यालय की सांठ गांठ से हटाया जा रहा है।
बिंदा देवी, उपभोक्ता।
3. कई डीलरों का व्यवहार भी रुखा रहता है। कार्ड की सूची से नाम काटा जाता है।
सफलती देवी, उपभोक्ता।
4. उसना चावल लाने के लिए दूसरे पंचायत के डीलर यहां जाना पड़ता है। विभाग को नियमित उसना चावल देना चाहिए।
कुमोदिया देवी, उपभोक्ता।
5. जनवितरण प्रणाली से उसना लेने पर प्रति यूनिट एक किलो चावल कम मिलता है।
नीरा देवी, उपभोक्ता।
6. राशन कार्ड में कुल सदस्य तो रहता है, परन्तु एक सदस्य का नाम दो तीन बार अंकित कर कम राशन दिया जाता है।
रुकमा देवी, उपभोक्ता।
बोले पदाधिकारी :
एमओ के लॉगिंग से आवंटन बनता है। एसआईओ जो आता है उसी अनुसार खाद्यान्न आपू्त्तित की जाती है। एक माह पहले ही आया हूं। लगातार आपू्त्तित घट रही है। एसएफसी के ठेकेदार ही मोटिया को मजदूरी देते हैं। पहले क्या हुआ नहीं जानते। अब मेरे समय में वैसा कुछ नहीं होगा। उसना चावल पर नियंत्रण होगा।
मोहम्मद सलाउद्दीन, एजीएम, पीडीएस गोदाम अलौली।
फोटो 4 :
कैप्शन: मंगलवार को पीडीएस गोदाम मे चावल अनलोड करते मोटिया मजदूर।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।