महाशिवरात्रि पर विकटनाथ बाबा का दर्शन के लिए लगेगी भीड़
तेल्हाड़ कुंड जलप्रपात के पास 400 फुट नीचे एक अंधेरी गुफा है, जहाँ विकटनाथ बाबा का प्राचीन शिवलिंग स्थित है। महाशिवरात्रि पर भक्त यहाँ दर्शन करने के लिए आते हैं। गुफा में पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को...

तेल्हाड़ कुंड के पास 400 फुट नीचे व 50 फुट अंधेरी गुफा है शिवलिंग तीन फुट चौड़ी व उंची गुफा में बैठकर व लेटकर जाते हैं दर्शन-पूजन करने (पेज चार) भगवानपुर, एक संवाददाता। अधौरा प्रखंडके तेल्हाड़ कुंड जलप्रपात के पास 400 फुट खाईं में एक ऐसी अंधेरी गुफा है, जिसमें स्थित विकटनाथ बाबा के दर्शन-पूजन के लिए महाशिवरात्रि के दिन काफी भक्तों की भीड़ जुटेगी। इस गुफा की चौड़ाई तीन फुट व उंचाई करीब चार फुट होगी। महादेव तक पहुंचने के लिए भक्तों को बैठकर व लेटकर 50 फुट की दूरी तय करनी पड़ती है। इसे अंधेरी गुफा के नाम से भी जाना जाता है। विकटनाथ बाबा के पास जाने के लिए उंची पहाड़ी से नीचे उतरना पड़ता है। शिव भक्त दीपक कुमार, रीतेश कुमार, ललन कुमार ने बताया कि बाबा तक पहुंचने में काफी दिक्कत होती है। चोट भी लग जाती है। शरीर के कुछ अंग छिल व कट भी जाते हैं। लेकिन, बाबा के दरबार में पहुंचने पर सकून व शांति मिलती है। भगवानपुर के 95 वर्षीय सिपाही पांडेय मनमौजी से पूछने पर कहा कि विकटनाथ बाबा का शिवलिंग कितना प्राचीन है, किसी को पता नहीं है। वहां की यात्रा तो काफी कष्टकारक होती है। विंध्य पर्वत की शृंखला में कैमूर पहाड़ी में कई गुफाए हैं। इन्हीं गुफाओं में से एक यह भी गुफा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि यहां महाशिवरात्रि के अलावा बसंत पंचमी, नवरात्र व मकर संक्रांति के दिन भी लोग पूजा करने आते हैं। यहां मेला भी लगता है। धीरे-धीरे इस स्थल के बारे में अब काफी लोग जानने लगे हैं। यही कारण है कि यूपी के सोनभद्र के भी शिव भक्ता यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं। रीतेश व दीपक बताते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन उनके मित्र भभुआ व मोहनियां से आएंगे। उन्हें के साथ बाबा का दर्शन करने जाएंगे। क्या है मंदिर की मान्यता मोहनपुर के जितेंद्र बताते हैं कि उनके घर के वृद्धजन बताते थे कि बहुत पहले कुछ शिकारी जानवर का शिकार करते-करते गुफा में पहुंचे, जहां उन्हे यह अद्भुत शिवलिंग दिखा। तब से यहां साधु-संत आने लगे। कुछ लोग यहां भी तप भी करते थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 से यहां मेला भी लगाया जा रहा है, जिसमें काफी लोग आते हैं। यहाँ पहुंचने का तीन रास्ता है। पहला तेल्हाड़ा कुंड के पास से उतरने के लिए संकीर्ण घाटी का रास्ता है। दूसरा करर गांव के पास से और तीसरा मंदिर के उत्तर से उतरने और चढ़ने का रास्ता है। फोटो- 21 फरवरी भभुआ- 5 कैप्शन- अधौरा प्रखंड के तेल्हाड़ कुंड के पास अंधेरी गुफा के अंदर स्थित प्राचीन शिवलिंग। (सिंगल फोटो)
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