बस नाम का सेवा का अधिकार कानून
लोक सेवा अधिकार कानून के प्रभावी होने वर्षों बाद भी आम लोगों को संबंधित सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। समयवद्धता को सरकार द्वारा बाध्यकारी बनाने और जुर्माने का प्रावधान करने के बावजूद सदर अनुमंडल...
लोक सेवा अधिकार कानून के प्रभावी होने वर्षों बाद भी आम लोगों को संबंधित सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। समयवद्धता को सरकार द्वारा बाध्यकारी बनाने और जुर्माने का प्रावधान करने के बावजूद सदर अनुमंडल के छह प्रखंड/ अंचलों में विभिन्न सेवाओं/सूचनाओं संबंधी कुल 2776 आवेदनों में से 1914 बगैर निष्पादन के ही लैप्स या एक्सपायर हो गए हैं।
महज 491 आवेदकों को ही वाच्छित योजना व सेवाओं का लाभ दिनाने में सिस्टम को कामयाबी मिल सकी। एसडीएम विद्यानाथ पासवान बताते हैं कि लोक सभा चुनाव की आचार संहिता के प्रभावी रहने के दौरान विभिन्न प्रकार के सामाजिक सुरक्षा पेंशन और सेवा अधिकार कानून के दायरे में आने वाले प्रमाण प्रत्रों यथा आय, जाति, निवास एलपीसी आदि को निर्धारित समयसीमा में बगैर सेटिंग गेटिंग के प्राप्त करना लगभग असंभव हो रहा है।
पांच पांच काउंटर निर्धारित होने के बावजूद हर प्रखंड/अंचल में एक से दो ही काउंटर कार्यरत हकीकत में काउंटर कार्यरत्त हैं। ऑन लाइन आवेदनों का निष्पादन और टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
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