चंडी स्थान पगडेरा में सच्चे दिल से की गई मनोकामना होती पूरी
कुर्साकांटा के पगडेरा स्थित चंडीका स्थान में 55 वर्षों से वासंतिक नवरात्र की पूजा हो रही है। पहले झोपड़ी में पूजा होती थी, अब पक्के मकान में। नवरात्र में प्रतिदिन एक लाख शिवलिंग की पूजा होती है।...

कुर्साकांटा, निज प्रतिनिधि कुर्साकांटा प्रखंड के पगडेरा स्थित चंडीका स्थान में वासंतिक नवरात्र की पूजा-अर्चना 55 वर्षो से अधिक समय से होती आ रही है। पहले यहां झोपड़ी में पूजा-अर्चना होती थी लेकिन वर्ष1987 से पक्का के मकान में होती आ रही है। नवरात्र के अवसर पर भगवती, लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक, शिव, बजरंगबली आदि की प्रतिमा बनाकर घूम-घाम से पूजा-अर्चना की जाती है। ग्रामीणों की मानें तो इस मंदिर में सच्चे दिल से अराधना करने पर हर मुरीद पुरी होती है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष के अष्टमी में महाभोग सह भंडारा का आयोजन होता है। साथ ही रामचरित मानस का पाठ भी होता है। यही नही नवरात्र के दौरान प्रतिदिन एक लाख शिवलिंग की मूर्ती की पूजा की जाती है। यह शिवलिंग की मूर्ती गांव के प्रत्येक घर से बनकर आता है। पूजा के बाद 101 कुमारी कन्या को भी खिलाया जाता है। संध्या के समय गांव के हर घर की महिलाओं द्वारा सुख, समृद्धि व शांति के लिए दीप जलायी जाती है। रात्रि में ग्रामीणों द्वारा भजन कीर्तन का आयोजन होता है।
षष्ठी को पालकी से लाया जाता है बेल
षष्ठी पूजा की संध्या ग्रामीण मंदिर में एकत्रित होकर गाजे बाजे के साथ पगडेरा मौजा से बाहर किसी भी गांव में जहां वृक्ष के एक डंटल में लगे दो बेल हो, उस बेल बृक्ष के पास जाकर पहले पूजा अर्चना करते हैं। फिर सप्तमी को उस वृक्ष से बेल को तोड़ कर पालकी से मंदिर लाकर पूजा अर्चना की जाती है।
ग्रामीणों के सहयोग से होती है पूजा
यहां होने वाली पूजा में हर ग्रामीण का सहयोग होता है। सप्तमी की रात्रि जहां जागरण कार्यक्रम का आयोजन होता है वहीं अष्टमी से दसमी तक अष्टयाम सह संर्कीतन का आयोजन किया जाता है। इस दौरान मेला का भी आयोजन होता है। मंदिर के पहले पुजारी स्व कृपानन्द झा को बनने का सौभाग्य प्राप्त है। उनके निधन सर्वानन्द झा पुजारी के रुप में मंदिर में पूजा पाठ कर रहे हैं। जबकि प्रथम मूर्तिकार के रुप में सोनामनी गुदाम के निवासी बाल मुकुन्द को जाता है अब तक वे हीं मूर्ती बनाते आ रहा है।
पूजा कमेटी है समर्मित
पूजा के सफल आयोजन में कमेटी के अध्यक्ष ललन झा, मुखिया प्रमोद यादव, शिवशंकर राजभर, रमानन्द साह, दिलीप कुमार झा, लीलेन्द्र झा, अवधेश झा, राज कुमार झा, कन्हैया झा सहित पूरा ग्रामीण समर्मित रहता है।
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