दिल्ली में अब ऐसे चलाएं अपनी पुरानी BS3-BS4 कार, कोई पुलिसवाला नहीं रोकेगा; एक्सपर्ट से समझें सबकुछ
दिल्ली सरकार के नए फरमान कार चलाने वालों के लिए मुसीबत खड़ी करते जा रहे हैं। पहले जहां सरकार ने BS3 और BS4 व्हीकल को चलाने पर रोक लगाई। तो अब ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू होने की खबरें भी हैं।

दिल्ली सरकार के नए फरमान कार चलाने वालों के लिए मुसीबत खड़ी करते जा रहे हैं। पहले जहां सरकार ने BS3 और BS4 व्हीकल को चलाने पर रोक लगाई। तो अब खबरें है कि 13 नवंबर से एक बार फिर ऑड-ईवन नंबर्स का फॉर्मूला लागू होने वाला है। ये सारी कवायद दिल्ली में बढ़ रहे पॉल्युशन को कम करने के लिए की जा रही है। दिल्ली के साथ NCR और गुरुग्राम में भी BS3 और BS4 व्हीकल पर रोक लगा दी है। ऐसे में आपके पास भी ऐसे इंजन वाली कार है तब आपके सामने क्या विकल्प रह जाता है। क्या इन गाड़ियों को आप कभी नहीं चला पाएंगे? या फिर इन्हें चलाने के लिए कोई दूसरा ऑप्शन है? इस खबर में इन तमाम बातों को विस्तार से जानते हैं।
किन BS3 और BS4 व्हीकल पर रोक
सबसे पहले आपको ये समझना होगा कि क्या सभी तरह के BS3 और BS4 व्हीकल को दिल्ली में बंद कर दिया गया है। तो इसका जवाब है नहीं। दरअसल, BS4 पेट्रोल इंजन वाली जो गाड़ियां 2010 या उसके बाद खरीद गई हैं, उन्हें चलाने की परमिशन है। क्योंकि वो दिल्ली रजिस्ट्रेशन के हिसाब से अधिकतम 13 साल पुरानी ही होती हैं। जबकि पेट्रोल गाड़ियों के लिए नियम 15 साल का है। हालांकि, BS3 पेट्रोल इंजन वाली पूरी तरह बंद कर दी गई हैं।
दूसरी तरफ, BS3 और BS4 डीजल कारों को चलाने पर पूरी तरह पाबंदी है। भले ही वो 10 साल से कम पुरानी हों। ध्यान रहे इन कारों को चलाने पर 20 हजार का तगड़ा जुर्माना भी है। यदि कोई नई डीजल कार खरीद रहा है तब उसे चला पाएगा। नई कारों में BS6 नॉर्म्स वाले डीजल इंजन का इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि आपको पास कोई इलेक्ट्रिक कार है तब आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। सरकार ने इलेक्ट्रिक कारों पर किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाई है। इन कारों को ऑड-ईवन फॉर्मूला वाले दिनों में भी डेली चला पाएंगे।
आखिर क्या है BS3, BS4 और BS6?
BS का मतलब एमिशन स्टैंडर्ड से होता है। BS यानी भारत स्टेज से पता चलता है कि आपकी गाड़ी कितना प्रदूषण फैलाती है। BS के साथ जो नंबर होता है उससे ये पता चलता है कि इंजन कितना प्रदूषण फैलाता है। नंबर जितना बड़ा होगा प्रदूषण उतना कम होगा। इसी तर्ज पर BS3, BS4 और BS6 निर्धारित किया जाता है। BS6 लागू होने के बाद प्रदूषण को लेकर पेट्रोल और डीजल कारों के बीच ज्यादा अंतर नहीं रह गया। डीजल कारों से 68% और पेट्रोल कारों से 25% तक नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन कम होता है।
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CNG में कन्वर्ट कराकर चला पाएंगे
दिल्ली सरकार ने जिन BS3 और BS4 कारों के चलाने पर बैन लगाया है, क्या उन्हें CNG में कन्वर्ट कराकर चला पाएंगे। इसे लेकर ऑटो एक्सपर्ट और पॉपुलर यूट्यूबर (Ask CarGuru) अमित खरे ने बताया कि ये मुमकिन है कि पेट्रोल कार में CNG किट लगाकर चला पाएं, लेकिन इसमें भी आपको कई बातों का ध्यान रखना होगा। यदि आपकी BS4 कार 13 साल के करीब हो चुकी है और इसमें CNG किट लगवाते हैं तब आपको 50 से 60 हजार रुपए खर्च करने होंगे। BS3 में ये किट नहीं लगा पाएंगे, क्योंकि ये कार पूरी तरह बैन हैं।
कार में CNG किट लगाने के बाद उसका रजिस्ट्रेशन फिर से कराना होगा। साथ ही, इंश्योरेंस भी कराना होगा। इस दोनों काम में कम से कम 4000 से 5000 रुपए का अतिरिक्त खर्च आ सकता है। यानी 2 साल गाड़ी चलाने के लिए महंगा सौदा होगा। ऐसे में ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू हो जाता है तब आप CNG किट लगवाने के बाद भी अपनी कार को साल में आधे दिन ही चला पाएंगे। दूसरी तरफ, डीजल कार को CNG में कन्वर्ट नहीं कराया जा सकता।
दिल्ली में कारों में CNG किट लगाने के कई ऑथराइज्ड वेंडर हैं। इन्हें सर्टिफाइट CNG फिटर भी कहा जाता है। इन्हें ही कारों में CNG किट लगाने की अनुमति होती है। CNG लगाने के बाद ये सर्टिफाइट पेपर भी देते हैं। जिसमें इनका रजिस्ट्रेशन नंबर भी होता है। तभी RTO इन किट को अप्रूव करता है। तो आप यदि BS4 पेट्रोल कार में CNG किट लगवाने का प्लान बना रहे हैं तब आपको इस बात भी ध्यान रखें कि किट लगाने वाला ऑथराइज्ड वेंडर ही हो।
डीजल कारों में CNG किट क्यों नहीं लगती?
पेट्रोल और डीजल कारों के चलने के सिस्टम में अंतर होता है। इसी वजह से डीजल कारों में CNG किट का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। डीजल कारों में स्पार्क प्लग नहीं होते। इन कारों में जब प्रेशर बनता है तब डीजल खुद से बर्न होता है। ऐसे में डीजल जलता है तो कार को एनर्जी मिलती है। जबकि पेट्रोल कार में इग्निशियन देना पड़ता है। जब स्पार्क प्लग लाइट देता है तब पेट्रोल जलता है उससे कार को पावर मिलती है। CNG को भी स्पार्क की जरूरत होती है। डीजल कारों में CNG किट लगाएंगे तब उनमें स्पार्क प्लग की भी जरूरत होगी। यानी उसके हेड मैकेनिज्म में चेंजेस करने होंगे।
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ऑड-ईवन फॉर्मूला से सभी को बचना होगा
दिल्ली में 13 नवंबर से ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू होता है तब उससे ना सिर्फ दिल्लीवालों को बल्कि दूसरी स्टेट से दिल्ली में जाने वालों को भी बचना होगा। दिल्ली सरकार के इस नियम में किसी को भी धूट नहीं मिलेगी। यानी अगर आप किसी दूसरी स्टेट से दिल्ली होकर दूसरी स्टेट में जा रहे हैं तब भी आपको यहां एंट्री नहीं मिलेगी। यदि गलती से आप एंट्री कर जाते हैं तब आपकी कार का चालान भी किया जा सकता है। हालांकि, इसे लेकर 1-2 दिन में पूरी गाइडलाइन जारी कर दी जाएगी। ऑड-ईवन फॉर्मूला में इन बातों का रखना होगा ध्यान...
1) ऑड-ईवन फॉर्मूला का गणित किसी भी इलेक्ट्रिक कार के लिए लागू नहीं होगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल को पूरी छूट मिलेगी। वे बिना किसी रोक-टोक के शहरभर में घूम पाएंगे।
23) दिल्ली सरकार जब ऑड-ईवन का फॉर्मूला लागू करती है तब उसमें CNG व्हीकल को छूट दी जाती है। इसके लिए कारों पर CNG स्टीकर्स का लगना जरूरी होता है।
3) कमर्शियल व्हीकल के लिए ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू नहीं होता। यानी आपके पास कमर्शियल व्हीकल है तब आप बिना किसी टेंशन के हर दिन अपनी गाड़ी चला पाएंगे।
लोगों के लिए एक्सपर्ट की राय
अमित खरे का कहना है कि जो लोग दिल्ली में डेली कार से ट्रैवल करते हैं उन्हें अब इलेक्ट्रिक कारों की तरफ शिफ्ट होना चाहिए। इन कारों के कई फायदे हैं। पहला, इन्हें खरीदने पर सरकार की तरफ से सब्सिडी के साथ RTO और रजिस्ट्रेशन में छूट या डिस्काउंट मिल जाता है। दूसरा, दिल्ली में पॉल्यूशन के बढ़ते स्तर को देखते हुए फ्यूचर में ICE कारों को लेकर अलग-अलग नियम आते रहेंगे, जबकि इलेक्ट्रिक कारों को पूरी आजादी मिलेगी। तीसरी और सबसे जरूरी बात कि इलेक्ट्रिक कारों से एन्वायरमेंट तो बेहतर होगा ही हर महीने आपकी तगड़ी बचत भी होगी।
यदि 13 नवंबर से ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू हो जाता है तो किसी एक ऑफिस या आसपास के ऑफिस में जाने वाले लोग कोशिश करें कि एक ही कार से ट्रैवल करें। यदि कार से चलने वाले सभी लोगों के पास ईवन या ऑड नंबर्स की ही कार है तब मिलकर कैब से ट्रैवल करें। कमर्शियल व्हीकल पर रोक-टोक नहीं होगी इस वजह से आप बिना टेंशन के ट्रैवल कर पाएंगे। मिलकर ट्रैवल करने में पैसे भी आधे ही खर्च होंगे।
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